ओलम्पिक पदक के लिए खिलाड़ियों को मिल रही हरसंभव सुविधा -

ओलम्पिक पदक के लिए खिलाड़ियों को मिल रही हरसंभव सुविधा

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राकेश थपलियाल
ओलम्पिक वर्ष में खिलाड़ियों की तैयारी बहुत महत्व रखती है।
वैसे तो जापान के टोक्यो शहर में ओलम्पिक खेलों का आयोजन 2020 में होना था लेकिन कोरोना संकट के कारण इसे 2021 मे कराने का फैसला किया गया था। अब दुनिया के इस सबसे बड़े   खेल आयोजन में लगभग छह माह का समय रह गया है। इस कारण खिलाड़ियों को हरसंभव सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार, भारतीय खेल प्राधिकरण और खेल संगठन खिलाड़ियों  के साथ मिलकर  उच्च स्तर के प्रशिक्षण पर जोर दे रहे हैं। सभी चाहते हैं कि इस बार भारतीय खिलाड़ी बड़ी संख्या में पदक जीतें। ओलम्पिक के लिए क्वालीफाई कर चुके कुछ खिलाड़ी विदेश में ट्रेनिंग के रहे हैं तो ज्यादातर भारत में अभ्यास कर रहे हैं। जो भारत में प्रशिक्षण शिविर में हैं या अब शामिल होंगे उनके लिए खेल मंत्रालय ने भारतीय खेल प्राधिकरण के जरिए विशेष व्यवस्था कि है।
भारतीय खेल प्राधिकरण ने ओलम्पिक खेलों से जुड़े एथलीटों के लिये उचित प्रशिक्षण जारी रखना सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपने प्रशिक्षण केंद्रों में वापस लौटने वाले खिलाड़ियों के लिए नियमों में संशोधन किया है।
11 सितंबर और 3 दिसंबर, 2020 को जारी की गई मानक संचालन प्रक्रियाओं में आंशिक संशोधन करते हुए, भारतीय खेल प्राधिकरण ने यह सुनिश्चित किया है कि राष्ट्रीय शिविरों में लौटने वाले और भारतीय खेल प्राधिकरण के प्रशिक्षण केंद्रों और अन्य प्रशिक्षण केंद्रों में सुरक्षा से समझौता किए बिना प्रशिक्षण जारी रख सकते हैं।
एक बयान में, भारतीय खेल प्राधिकरण ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए उपाय पेश किए गए हैं जिससे एथलीट अपने प्रशिक्षण कार्यक्रम में निरंतरता बनाए रखने में सक्षम हो सकें। इस फैसले से एथलीट अपने प्रशिक्षण दिनचर्या को फिर से शुरू कर सकेगा, लेकिन उस खिलाडी को पहले सात दिनों तक बायो बबल में बने रहने वाले एथलीटों से दूर रखा जाएगा। यह अलगाव तब तक जारी रहेगा जब तक वह नकारात्मक आरटी-पीसीआर जांच रिपोर्ट नहीं जमा कर देता।
टोक्यो ओलम्पिक खेलों के लिए छह महीने ही बचे हैं और घरेलू और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता फिर से शुरू होने के साथ, एथलीटों के पास ओलंपिक खेलों के लिए योग्यता हासिल करने या प्रतियोगी स्पर्धा हासिल करने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं में शामिल होना शुरू हो जाएगा। एक प्रतियोगिता में भाग लेकर वापस लौटने पर हर बार सात दिनों के लिए खुद को क्वारंटाइन में रखने से खिलाड़ी का उसकी खेल स्पर्धा का तारतम्य टूट जाता है और इससे उनके प्रशिक्षण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
भारतीय खेल प्राधिकरण ने अपने सभी प्रशिक्षण केंद्रों के प्रमुखों से कहा है कि विभिन्न प्रतियोगिताओं से लौट रहे एथलीट को तब तक एक अलग हॉस्टल या हॉस्टल के ब्लॉक में रखा जाना चाहिए, जब तक कि उनकी आरटी-पीसीआर जांच सात दिनों के अंत में नकारात्मक न प्राप्त हो जाए। वापस लौटने वाले एथलीट को उन एथलीट के संपर्क में आने से रोकने के लिये भी कहा गया है जो बायो बबल में रह रहे हैं।
भारतीय खेल प्राधिकरण सभी प्रशिक्षण केंद्रों के प्रमुखों और प्रशिक्षकों को एक उचित कार्यक्रम तैयार करने का निर्देश दिया गया है ताकि प्रतियोगिता से लौटने वाले एथलीट प्रशिक्षण की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए खेल, जिम और खेल विज्ञान सुविधाओं के क्षेत्र का उपयोग कर सकें, लेकिन संबंधित केंद्रों में पहले से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे एथलीटों की सुरक्षा से समझौता किए बिना वापस लौटने वाले एथलीट्स का प्रशिक्षण जारी रखा जाए।
इसी तरह, सभी केंद्रों को आरटी-पीसीआर जांच रिपोर्ट उपलब्ध होने तक प्रतियोगिता से लौटने वाले एथलीटों के लिए अलग से भोजन की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है। उन जगहों पर जहां एक अलग भोजन क्षेत्र बनाना संभव नहीं है, वे शिविर में वापस रहने वाले लोगों के साथ ऐसे व्यक्तियों के साथ जाने से रोकने के लिए एक विस्तृत कार्यक्रम बनाएंगे।
पदक के लिए खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के तहत ओलम्पिक
 के लिये क्वालिफाई कर चुके दो निशानेबाजों, मनु भाकर और अंगद वीर सिंह बाजवा को लक्ष्य   ओलम्पिक पोडियम योजना (टीओपीएस) के तहत बेहतर तैयारियों के लिये खेल मनोवैज्ञानिक संजना किरण की सेवाए प्राप्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले से इस वर्ष के अंत में होने वाले टोक्यो  ओलम्पिक  के लिए इन निशानेबाज़ों की तैयारी में सहायता मिल सकेगी। मिशन   ओलम्पिक इकाई की  बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी।
सिंगापुर की संजना किरण खेल मनोविज्ञान और प्रदर्शन मनोविज्ञान के क्षेत्र में एक उच्च प्रदर्शन विशेषज्ञ हैं। उन्होंने प्रमुख खिलाड़ियों और बड़े बड़े प्रशिक्षकों को प्रमुख स्पर्धाओ और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए सहयोग प्रदान किया है।
मनु भाकर ने टोक्यो में होने वाले ओलंपिक खेलों की महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल और महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल, दोनों स्पर्धाओ में भाग लेने के लिए पात्रता हासिल की है। ओलंपिक के लिए अपनी तैयारी के हिस्से के रूप में एक खेल मनोवैज्ञानिक की भूमिका के बारे में मनु भाकर ने कहा, “एक ऐसे खेल में जिसमें मानसिक रूप से मजबूती अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। निशानेबाज़ी खेल में स्थिरता के साथ प्रदर्शन करने में सक्षम होने के लिए, संजना किरण का मार्गदर्शन प्राप्त करने से मुझे ओलंपिक के लिए बेहतर तैयारी करने में मदद मिलेगी।”
वर्तमान में भारतीय जूनियर राइफल शूटिंग टीम की उच्च प्रदर्शन विशेषज्ञ प्रशिक्षक, ओलंपियन और एशियाई खेलों तथा राष्ट्रमंडल खेलों में पदक विजेता सुमा शिरूर ने निशानेबाजों के साथ काम करने के लिये मनोवैज्ञानिक की नियुक्ति की मंज़ूरी के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा, “खेल इस समय अधिक पेशेवर हो रहे हैं। अगर हमें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदार्शन हासिल करना है, तो विशेषज्ञों को शामिल क्यों नहीं करना चाहिये। हमारे समय में, हमने अनुभव के माध्यम से सीखा था, लेकिन आजकल के निशानेबाजों ने बहुत कम उम्र में ही निशानेबाज़ी शुरु कर दी है, इसलिए विशेषज्ञ उनके सीखने की प्रक्रिया को तेज करेंगे। ”
शिरूर ने कहा कि अधिकांश ओलंपिक के लिये पात्रता हासिल कर चुके निशानेबाज़ किशोर हैं या उनकी उम्र 20 वर्ष के आस पास है। इसके अलावा कोरोनो वायरस महामारी के कारण ये निशानेबाज़ प्रतिस्पर्धी खेलो से काफी लंबी अवधि से दूर रहे हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए एक मनोवैज्ञानिक द्वारा उनकी मदद करना और भी महत्वपूर्ण है।
संजना किरण के साथ मनु भाकर और बाजवा के साथ ऑनलाइन सत्र शामिल हैं। इसके अलावा इन खिलाड़ियों को परामर्श देने के लिये की गई यात्रा और प्रतियोगिताओं में शामिल होने के लिए यात्राओं पर होने वाला व्यय शामिल हैं।
दोनों निशानेबाजों के साथ जनवरी 2021 से शुरू होने वाली किरण की नियुक्ति की कुल लागत लगभग 29 लाख रुपये है।
लक्ष्य ओलंपिक पोडियम योजना (टीओपीएस) के तह्त दोनो निशानेबाजों को यह राशि देने से पहले अंगद वीर सिंह बाजवा के लिए 68.39 लाख रुपये स्वीकृत किये गये थे। बाजवा ने अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण, गोला बारूद और जेब खर्च के भत्ते पर पुरुषों की स्कीट में ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया है। मनु भाकर के लिए इस योजना के तहत 21.49 लाख रुपये गोला-बारूद, उपकरण और जेब खर्च के भत्ते के रूप में स्वीकृत किये गये थे।
खेलमंत्री किरेन रीजीजू
सरकार की तरफ से खिलाड़ियों की जरूरतों को समझते हुए पूरी मेहनत से जुटे हुए हैं। देखने वाली बात यही होगी कि ओलंपिक में भारत का नाम कितना चमकेगा।
(लेखक खेल टुडे पत्रिका के संपादक हैं।)

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