खिलाड़ियों को भारत का गौरव भी बढ़ाना है और लोगों का दिल भी जीतना है : नरेंद्र मोदी -

खिलाड़ियों को भारत का गौरव भी बढ़ाना है और लोगों का दिल भी जीतना है : नरेंद्र मोदी

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‘मन की बात’ की 78वीं कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, देशवासियों मैं आपको भी सलाह देना चाहता हूँ, हमें जाने-अनजाने में भी हमारे इन खिलाड़ियों पर दबाव नहीं बनाना है, बल्कि खुले मन से, इनका साथ देना है।

खेल टुडे ब्यूरो

नई दिल्ली।’मन की बात’ की 78वीं कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओलंपिक खेलों में जाने वाले खिलाडियों को शुभकामनाएं देते हुए देशवासियों से उनका उत्साह बढ़ाने की अपील की है।

अपने आज के संबोधन में उन्होंने कहा, मेरे प्यारे देशवासियो,नमस्कार! अक्सर‘मन की बात’ में, आपके प्रश्नों की बौछार रहती है। इस बार मैंने सोचा कि कुछ अलग किया जाए, मैं आपसे प्रश्न करूं तो, ध्यान से सुनिए मेरे सवाल।

….Olympic में Individual Gold जीतने वाला पहला भारतीय कौन था?

….Olympic के कौन से खेल में भारत ने अब तक सबसे ज्यादा medal जीते हैं?

…Olympic में किस खिलाड़ी ने सबसे ज्यादा पदक जीते हैं?

साथियो, आप मुझे जवाब भेजें, पर MyGov में Olympics पर जो quiz है, उसमें प्रश्नों के उत्तर देंगे तो कई सारे इनाम जीतेंगे। ऐसे बहुत सारे प्रश्न MyGovके ‘Road to Tokyo Quiz’ में हैं। आप ‘Road to Tokyo Quiz’ में भाग लें। भारत ने पहले कैसा perform किया है ? हमारी Tokyo Olympics के लिए अब क्या तैयारी है ?- ये सब ख़ुद जानें और दूसरों को भी बताएं। मैं आप सब से आग्रह करना चाहता हूँ कि आप इस quiz competition में ज़रुर हिस्सा लीजिये।

साथियो, जब बात Tokyo Olympics की हो रही हो, तो भला मिल्खा सिंह जी जैसे legendary athlete को कौन भूल सकता है !कुछ दिन पहले ही कोरोना ने उन्हें हमसे छीन लिया। जब वे अस्पताल में थे, तो मुझे उनसे बात करने का अवसर मिला था।

बात करते हुए मैंने उनसे आग्रह किया था। मैंने कहा था कि आपने तो 1964 में Tokyo Olympics में भारत का प्रतिनिधित्व किया था, इसलिए इस बार, जब हमारे खिलाड़ी,Olympics के लिए Tokyo जा रहे हैं, तोआपको हमारे athletes का मनोबल बढ़ाना है, उन्हें अपने संदेश से प्रेरित करना है। वो खेल को लेकर इतना समर्पित और भावुक थे कि बीमारी में भी उन्होंने तुरंत ही इसके लिए हामी भर दी  लेकिन, दुर्भाग्य से नियति को कुछ और मंजूर था। मुझे आज भी याद है 2014 में वो सूरत आए थे। हम लोगों ने एक Night Marathon का उद्घाटन किया था। उस समय उनसे जो गपशप हुई, खेलों के बारे में जो बात हुई, उससे मुझे भी बहुत प्रेरणा मिली थी। हम सब जानते हैं कि मिल्खा सिंह जी का पूरा परिवार sports को समर्पित रहा है, भारत का गौरव बढ़ाता रहा है।

साथियो, जब Talent, Dedication, Determination और Sportsman Spirit एक साथ मिलते हैं, तब जाकर कोई champion बनता है।हमारे देश में तो अधिकांश खिलाड़ी छोटे-छोटे शहरों, कस्बों, गाँवों से निकल करके आते हैं।Tokyo जा रहे हमारे Olympic दल में भी कई ऐसे खिलाड़ी शामिल हैं, जिनका जीवन बहुत प्रेरित करता है। हमारे प्रवीण जाधव जी के बारे में आप सुनेंगे, तो, आपको भी लगेगा कि कितने कठिन संघर्षों से गुजरते हुए प्रवीण जी यहाँ पहुंचे हैं। प्रवीण जाधव जी, महाराष्ट्र के सतारा ज़िले के एक गाँव के रहने वाले हैं। वो Archery के बेहतरीन खिलाड़ी हैं। उनके माता-पिता मज़दूरी कर परिवार चलाते हैं, और अब उनका बेटा, अपना पहला,Olympics खेलने Tokyo जा रहा है। ये सिर्फ़ उनके माता-पिता ही नहीं, हम सभी के लिए कितने गौरव की बात है। ऐसे ही, एक और खिलाड़ी हैं, हमारी नेहा गोयल जी। नेहा,Tokyoजा रही महिला हॉकी टीम की सदस्य हैं। उनकी माँ और बहनें, साईकिल की factory में काम करके परिवार का ख़र्च जुटाती हैं। नेहा की तरह ही दीपिका कुमारी जी के जीवन का सफ़र भी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। दीपिका के पिता ऑटो-रिक्शा चलाते हैं और उनकी माँ नर्स हैं, और अब देखिए, दीपिका, अब Tokyo Olympics में भारत की तरफ से एकमात्र महिला तीरंदाज़ हैं। कभी विश्व की नंबर एक तीरंदाज़ रहीं दीपिका के साथ हम सबकी शुभकामनाएँ हैं।

साथियो, जीवन में हम जहां भी पहुँचते हैं, जितनी भी ऊंचाई प्राप्त करते हैं, जमीन से ये जुड़ाव, हमेशा, हमें अपनी जड़ों से बांधे रखता है। संघर्ष के दिनों के बाद मिली सफलता का आनंद भी कुछ और ही होता है।Tokyo जा रहे हमारे खिलाड़ियों ने बचपन में साधनों-संसाधनों की हर कमी का सामना किया, लेकिन वो डटे रहे, जुटे रहे।  उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर की प्रियंका गोस्वामी जी का जीवन भी बहुत सीख देता है। प्रियंका के पिता बस कंडक्टर हैं। बचपन में प्रियंका को वो बैग बहुत पसंद था, जो medal पाने वाले खिलाड़ियों को मिलता है। इसी आकर्षण में उन्होंने पहली बार Race-Walking प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। अब, आज वो इसकी बड़ी champion हैं।

शिवपाल सिंह।

Javelin Throw में भाग लेने वाले शिवपाल सिंह जी, बनारस के रहने वाले हैं। शिवपाल जी का तो पूरा परिवार ही इस खेल से जुड़ा हुआ है। इनके पिता, चाचा और भाई, सभी भाला फेंकने में expert हैं। परिवार की यही परंपरा उनके लिए Tokyo Olympics में काम आने वाली है।Tokyo Olympic के लिए जा रहे चिराग शेट्टी और उनके partner सात्विक साईराज का हौसला भी प्रेरित करने वाला है। हाल ही में चिराग के नाना जी का कोरोना से निधन हो गया था। सात्विक भी खुद पिछले साल कोरोना पॉज़िटिव हो गए थे। लेकिन, इन मुश्किलों के बाद भी ये दोनों Men’s Double Shuttle Competition में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की तैयारी में जुटे हैं।

एक और खिलाड़ी से मैं आपका परिचय कराना चाहूँगा, ये हैं, हरियाणा के भिवानी के मनीष कौशिक जी। मनीष जी खेती-किसानी वाले परिवार से आते हैं। बचपन में खेतों में काम करते-करते मनीष को boxing का शौक हो गया था। आज ये शौक उन्हें टोक्यो ले जा रहा है। एक और खिलाड़ी हैं, सी.ए. भवानी देवी जी। नाम भवानी है और ये तलवारबाजी में expert हैं। चेन्नई की रहने वाली भवानी पहली भारतीय Fencer हैं, जिन्होंने Olympic में qualify किया है। मैं कहीं पढ़ रहा था कि भवानी जी की training जारी रहे, इसके लिए उनकी माँ ने अपने गहने तक गिरवी रख दिये थे।

साथियो, ऐसे तो अनगिनत नाम हैं लेकिन ‘मन की बात’ में, मैं, आज कुछ ही नामों का जिक्र कर पाया हूँ। टोक्यो जा रहे हर खिलाड़ी का अपना संघर्ष रहा है, बरसों की मेहनत रही है। वो सिर्फ़  अपने लिए ही नहीं जा रहें बल्कि देश के लिए जा रहे हैं। इन खिलाड़ियों को भारत का गौरव भी बढ़ाना है और लोगों का दिल भी जीतना है और इसलिए मेरे देशवासियों मैं आपको भी सलाह देना चाहता हूँ, हमें जाने-अनजाने में भी हमारे इन खिलाड़ियों पर दबाव नहीं बनाना है, बल्कि खुले मन से, इनका साथ देना है, हर खिलाड़ी का उत्साह बढ़ाना है।

Social Media पर आप #Cheer4India के साथ अपने इन खिलाड़ियों को शुभकामनाएँ दे सकते हैं। आप कुछ और भी innovative करना चाहें, तो वो भी ज़रूर करें। अगर आपको कोई ऐसा idea आता है जो हमारे खिलाड़ियों के लिए देश को मिलकर करना चाहिए, तो वो आप मुझे ज़रुर भेजिएगा। हम सब मिलकर टोक्यो जाने वाले अपने खिलाड़ियों को support करेंगे – Cheer4India!!!Cheer4India!!!Cheer4India!!!

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