रंग बदली पिच पर ये वो जीत नहीं जिसे देखने के लिए दिल तरसे -

रंग बदली पिच पर ये वो जीत नहीं जिसे देखने के लिए दिल तरसे

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राकेश थपलियाल
(खेल टुडे पत्रिका और www.kheltoday.com के संपादक)

जीत तो जीत होती है, कैसे भी मिले, कैसी भी पिच हो, देश में मिले या विदेश में। चेन्नई में दूसरे टेस्ट में मिली 317 रनों से बड़े अंतर की जीत से भारत को चार टेस्ट मैचों की सीरीज में 1-1 से बराबरी पर पहुंचा दिया। फिर भी रंग बदली पिच पर ये वो जीत नहीं जिसे देखने के लिए दिल तरसे।
भारत इस जीत से मिले 30 अंकों से आईसीसी की वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल खेलने की दौड़ में बरकरार है। भारत को यह सीरीज 2-1 या 3-1 से जीतनी होगी। इंग्लैंड को 3-1 से जीतनी होगी। इसका अर्थ साफ है कि भारत बचे हुए दो टेस्ट में से एक जीत और एक ड्रॉ खेलने से फाइनल खेल जाएगा जबकि इंग्लैंड को दोनों टेस्ट जीतने होंगे। अगला टेस्ट मैच अहमदाबाद के नवनिर्मित स्टेडियम में दिन-रात का होगा और गुलाबी गेंद से खेला जाएगा।

चेन्नई में ही कुछ दिन पूर्व भारत पहला टेस्ट 227 रन से हारा था तो क्रिकेट प्रेमी निराशा हो गए थे। उन्हें लगा होगा कि अच्छा हुआ कि दर्शकों को स्टेडियम में आने की अनुमति नहीं थी। आस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीत भारतीय टीम का मनोबल सातवें आसमान पर था और इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के पहले मैच में शायद अतिविश्वास उन्हें ले डूबा था। दूसरे टेस्ट के लिए पिच का रंग बदला गया। एम ए चिदम्बरम स्टेडियम की लाल मिट्टी वाली पिच में काली मिट्टी की परत चढ़ाकर उसे लाल से काला कर दिया गया। स्पिनरों की मददगार ‘टेलरमेड’ पिच पर पहली गेंद से मिट्टी उड़ रही थी। यह तय था कि बल्लेबाजों को खासी दिक्कत आएगी और स्पिनर हावी रहेंगे। उम्मीद यह की गई थी कि इंग्लैंड के मुकाबले भारतीय बल्लेबाज स्पिनरों को बेहतर खेलेंगे और भारतीय स्पिनर इंग्लैंड के स्पिनरों की तुलना में ज्यादा कामयाब रहेंगे। उम्मीद यह भी थी कि विराट कोहली टॉस जीत लेंगे। हुआ भी ऐसा ही। स्थानीय हीरो रविचन्द्रन अश्विन से बहुत से विकेट चटकाने की उम्मीद थी, उन्होंने उम्मीद से बढ़कर शानदार प्रदर्शन कर शतक भी बनाया और पहली पारी में पांच विकेट सहित मैच में आठ विकेट भी चटकाए और ‘सोने पर सुहागा’ की तर्ज पर मैन आफ द मैच भी बने। कुल मिलाकर जिस उम्मीद के साथ पिच का रंग बदला गया था वह पूरी हुई। थोड़े दर्शकों को भी स्टेडियम में बैठकर मैच देखने को मिला जिन्होंने भारतीय क्रिकेटरों का उत्साह बढ़ाया और जीत के गवाह बने। कप्तान विराट कोहली ने भी दर्शकों की उपस्थिति को महत्वपूर्ण माना। जीत के बाद विराट का यह कहना बड़ा संतुलित लगा कि पिच और परिस्थतियां दोनों टीमों के लिए एक जैसी थीं और टॉस ज्यादा अंतर नहीं डाल सका। उनका तर्क था कि दूसरी पारी में भारतीय टीम ने अच्छा स्कोर बनाया। पहली पारी में रोहित शर्मा की शानदार शतकीय पारी के साथ अजिंक्य रहाणे और ऋषभ पंत के अर्धशतकों ने जीत की मजबूत बुनियाद रखने में भूमिका निभाई तो दूसरी पारी में अश्विन के शतक से पहले विराट कोहली के संघर्षपूर्ण अर्धशतक ने मैच में भारत की पकड़ बेहद मजबूत कर दी थी। पहली पारी में आफ स्पिनर मोइन अली की ओवरपिच गेंद पर विराट का बोल्ड होकर आश्चर्यचकित होकर पिच पर खड़े रहना यह दिखा गया था कि वह कितने परेशान हुए हैं। गेंदबाजों की बात करें तो अश्विन और अक्षर पटेल सबसे कामयाब रहे। पहली पारी में अश्विन तो दूसरी पारी में अक्षर ने पांच-पांच विकेट चटकाए। इंग्लैंड की तरफ से खब्बू स्पिनर जैक लीच और आफ स्पिनर मोइन अली छाए रहे। मोइन ने दोनों पारियों में चार-चार विकेट चटकाने के साथ दूसरी पारी में छक्कों की बरसात करते हुए 18 गेंदों में 43 रनों की पारी खेली। इसमें पांच छक्के और तीन चौके शामिल थे। इसके अलावा पहली पारी में कप्तान जो रूट और विकेट कीपर फॉक्स ही बल्ले से थोड़े कामयाब रहे। इस टेस्ट में खास बात यह रही कि स्वीप और रिवर्स स्विप शॉट काफी देखने को मिले।
इंग्लैंड के खिलाफ पहले दो टेस्ट मैच देखकर यह बात को साबित हो गई है कि भारतीयबल्लेबाजों को स्तरीय तेज और स्पिन दोनों तरह की गेंदबाजी को खेलने में महारथ हासिल करनी होगी। इसके बिना काम नहीं चलेगा और हमारी बल्लेबाजी कभी भी ताश के पत्तों के महल की तरह से ढहती रहेगी। युवा बल्लेबाजों को अपने आप को स्तरीय गेंदबाजी के लिए तैयार करना होगा। घरेलू क्रिकेट की टीमों के कोचों को भी इस पर विशेष ध्यान देना होगा तभी भारतीय क्रिकेट का भविष्य उज्जवल हो सकेगा।

 

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