सलीम दुर्रानी प्रिंस ऑफ इंडियन क्रिकेट थे: सलमान खुर्शीद -
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सलीम दुर्रानी प्रिंस ऑफ इंडियन क्रिकेट थे: सलमान खुर्शीद

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प्रेस क्लब में सलीम दुर्रानी की याद में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन

सलमान खुर्शीद श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए।

खेल टुडे ब्यूरो 
नई दिल्ली। पूर्व भारतीय टेस्ट क्रिकेटर अर्जुन अवॉर्डी सलीम दुर्रानी जिनका विगत दिनों 89 साल की उम्र में निधन हो गया । उनकी याद में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, नई दिल्ली में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।

उनके चार दशक पुराने सहयोगी इंदर मालिक द्वारा इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया । जिसमें बड़ी संख्या में पूर्व क्रिकेटर, क्रिकेट कोच, खेल पत्रकार, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के अलावा दिल्ली के क्रिकेट प्रेमियों ने श्रद्धांजलि सभा में शरीक होकर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए।


इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि के रूप में  पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनके साथ बिताए हुए पलों को याद कर कहा कि उनके जैसा कोई नहीं, सलीम जी एक ऐसे व्यक्ति थे जिनकी जितनी ही प्रशंसा की जाए कम पड़ जाएगी। उन्होंने कहा, “आईपीएल तो बीयर की तरह है जबकि सलीम दुर्रानी वाइन की पूरी बोतल की तरह थे। मैं भी क्रिकेटर बनना चाहता था दिल्ली कोल्ट्स क्लब में श्री राधाकृष्ण जी से सीखता था। मैं सलीम दुर्रानी की तरह बनना चाहता था। एक बार सलीम साहब को खेलता देखने के लिए सेंट स्टीफेंस कॉलेज से भाग कर रणजी मैच देखने रेलवे स्टेडियम गया था। उनका जलवा ही अलग था। मैं दाएं हाथ से गेंदबाजी करता था पर सोचता था कि सलीम साहब की तरह बाएं हाथ का गेंदबाज क्यों नहीं बन सका पर बाद में मुझे समझ आया कि सलीम जैसा कोई हो ही नहीं सकता।”

 

वरिष्ठ खेल पत्रकार और खेल टुडे पत्रिका के संपादक राकेश थपलियाल ने सलीम दुर्रानी के साथ बिताए पलों के बारे में कहा, “मैं हिंदुस्तान अखबार में काम करता था तो सलीम साहब और इंदर मालिक वहां आते थे और काफी समय बातें करते थे।  एक बार मैंने सलीम साहब को बताया कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड टेस्ट क्रिकेटर की विधवा को भी पेंशन देता है। इस पर उन्होंने कहा, तब तो मैं एक और शादी कर सकता हूं। तब मैंने कहा कि ऐसे में आप तीन माह ही जिंदा रहोगे। उन्होंने पूछा क्यों? मैंने कहा जो पेंशन के लालच में आप से शादी करेगी वो आपको जितना जल्दी होगा मार देगी। यह सुनकर वो बोले तब तो शादी रहने ही दो। लेकिन क्या ऐसा हो सकता है कि मेरे मरने के बाद मेरी बहन को पेंशन मिल जाए। मेरी बहन ने मेरे लिए बहुत कुछ किया है।”

 

राकेश ने कहा, “सलीम साहब बहुत ही नरमी से पेश आते थे और कभी अपने खेल के बारे में नहीं बताते थे। वह कहते थे कि ये खुदा की देन है कि मैं भारत के लिए खेल पाया। खेल को एंजॉय किया और खूब मेहनत की।”

श्रद्धांजलि सभा में पूर्व टेस्ट क्रिकेटर मदनलाल और दिल्ली के पूर्व रणजी खिलाड़ी वेंकट सुंदरम ने भी शरीक होकर उन्हें श्रद्धा सुमन पुष्प अर्पित किए।

मदन लाल ने सलीम दुर्रानी के बारे में कहा था, “मैं कभी उन्हें सलीम साहब या सलीम भाई नहीं कह पाया। मैं उन्हें हमेशा सम्मान से बापू कहा करता था।”

वेंकट सुंदरम ने कहा, “मैं उनके साथ खेल हूं। कई बार ऐसा हुआ कि मैचों में जिन गेंदबाजों ने उन्हें आउट करने का दावा कर कप्तानों से ओवर मांगा, वे चौके और छक्के खाने के बाद अंपायर से पूछते मिले कि कितनी गेंदें ओवर में बची हैं।”

आयोजक इंदर मलिक ने बताया कि ज्यादातर समय उनका दिल्ली में ही गुजरा और पिछले चार दशक से वह सीधे तौर पर सलीम साहब के साथ जुड़े रहे। ऐसे महान दिग्‍गज अपने फैन्‍स के बीच यादों का पिटारा छोड़ते हुए दुनिया से रुकसत कर गया। जिनकी बस अब सिर्फ यादें रह गई है।उन्होंने बताया की सलीम दुर्रानी एक हर दिल अजीज इंसान थे एक बार जो उनके संपर्क में आ गए उनके नजदीक से फिर उठने को उनका दिल नहीं करता था।इस मौके पर उनके बाल सखा और सबसे करीबी रहे जामनगर के वामन जानी ने कहा कि सलीम साहब के किस्से का अंत नहीं है। ऐसे हर दिल अजीज इंसान युगों युगों तक लोगों के दिलों में छाए रहेंगे। श्रद्धांजलि सभा में उनके दामाद और अंत तक उनकी देखभाल करने वाले इकबाल लाला सहित परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद थे।
सलीम दुर्रानी साहब एक ऐसी शहजादे सलीम थे जो दर्शकों की डिमांड पर सीधे छक्के लगाते थे।क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद वह 70 के दशक में फिल्मी दुनिया से भी जुड़े किंतु उनका इस क्षेत्र में मन नहीं लगा। खेल जगत से जुड़े अन्य खेल प्रेमियों ने भी श्रद्धा सुमन पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

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